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Difference Between Job and Business

Difference Between Job and Career-Business

वर्तमान युवापीढ़ी अपने Business को लेकर काफी चिंताग्रस्त नजर आती है. उनकी चिंता का कारण क्या है. वो की इतना ज्यादा चिंतित नाराज आते है. उनके द्वारा अपने Career को लेकर अच्छा मोड़ देने के लिए हर संभव प्रयास करते रहते है. ऐसे युवाओ के सभी सवालों के जवाब आज के इस ब्लॉग पोस्ट “Difference Between Job and Business” के माध्यम से बताने की कोशिश करेंगे. इसमें हम आपके लिए जॉब करना ठीक रहेगा या कोई बिज़नस करना ठीक रहेगा इन बातों की चर्चा करेंगे. 

आशा है आपको ये पोस्ट अच्छी लगेगी. तो आइये निचे दिए मुद्दों के माध्यम से हम उनका अध्यन करते है:-

1. पीढ़ीदर पीढ़ी चलने का अंतर :- 

यदि हम किसी कंपनी में जॉब करते है या फिर किसी भी संस्था से जुड़े है. या फिर क्यों न हम सरकारी जब कर रहे है. सभी स्थिति में हमें एक बात का ध्यान रखना चाहिए की, जॉब ये हमारी कोई पैतुक सम्पति नहीं है. 

इसको जब तक हमारी कार्य करने की क्षमता है तब तक ही हम कर सकते है और ठीक वैसे सरकारी नौकरी करने वाले कर्मचारी को कुछ इस प्रकार समझाना चाहिए की अगर सरकारी नौकरी आप कितने भी बड़े पद में रहे आप अपने किसी भी घर के व्यक्ति को वो पद नहीं दे सकते है. क्योकि वो पद आपके तक ही सिमित है. 

Difference Between Job and Career


इसके ठीक विपरीत आपके द्वारा कोई भी Business किया जाता है जो की कोई छोटा मोटा Business ही क्यों न हो ऐसे समय आपके द्वारा किया गया हर एक काम आपके अपना होगा. 

ऐसे समय हम अपने हिसाब से अपने कार्य को कर सकते है. हमारे ऊपर किसी भी प्रकार का दबाव नहीं होगा. ऐसे समय जब भी कोई बड़ा मुनाफा होगा तो वो हमारे लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा. 

हमारे सामने ऐसे बहुत से उदाहरन है जिसमे की, ऐसे भी लोग है जो अपनी अच्छी खासी जॉब्स को छोड़कर अपने पुस्तैनी व्यवसाय को करने आये है इसमें एक उदाहरन बहुत ही ज्यादा रौचक है. जिसमे मुनाफ कपाड़िया नाम के ३० वर्षीय युवक के द्वारा गूगल की लाखों की जॉब छोड़कर समोसे की दुकान जिसमे खासकर मटन समोसे की दुकान खोलने का फैसला ले लिया. इनकी समोसे बचने में कुछ खास बात तो थी जिसमे उनके कंपनी को लाखों के मुनाफे पर लाकर खड़ा कर दिया. फोर्ब्सथ पत्रिका के द्वारा उनके इस कार्य के लिए उन्हें under 30 achievers ली सूचि में उन्हें स्थान दिया था. 

कहने का अभिप्राय यही है की जो लोग केवल सरकारी जॉब के पीछे भाग रहे है. उनके लिए ये एक मोटिवेशन से कम नहीं है. क्योकि ऐसे भी बहुत से लोग है जो अपनी अच्छी नौकरी को छोड़कर अपने कुछ के व्यवसाय को बढावा दिया है.

2. अपने समय के मालिक खुद होते है :- 

यह भी के बाद फैक्टर है की जॉब और खुद के बिज़नस में अपने समय के हम खुद मालिक होते है. यदि हम किसी की जॉब करते है तो हमें सही समय पर पहुचकर वह हाजरी लगनी होती है. 

दिए हुए काम समय पर पूरा करना पड़ता है. ठीक इसके विपरीत हमारे खुद के व्यवसाय में हमें कोई भी रोकटोक नहीं होती है. यही करना है की हमें किसी भी प्रकार की बंदिश का एहसास नहीं होता है. 

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3. मुनाफे के मामले में कारगर है :- 

एक अच्छा पैमाना ये भी है की जॉब करने वाले व्यक्ति को जो पेमेंट तय होती है वही उसे पुरे महीने में मिलती है. लेकिन उस पेमेंट के मुकाबले उसमे मालिक या फर्म का जो भी लाभ मिलता है, वो उसमे से कुछ भी लेने का हक़दार नहीं होता है. 

यह एक विडम्बना है की मेहनत करने वाले व्यक्ति को एक फिक्स्ड आय होती है और जो कम मेहनत करता है उसे ज्यादा लाभ होता है. इसके ठीक विपरीत हमारे बिज़नस के अन्दर होता है. 

जो भी मुनाफा हो वो हमें ही होता है. और जो भी नुकसान हो वो भी हमें ही होता है. यह भी एक करना है जो बिज़नस को जॉब से बेहतर बनता है.

4. पदोन्नति के लिए इंतजार करना :- 

किसी भी जॉब में जब आप जुड़ते है तो आपको उसमे आगे बदने के लिए याने अपनी पदोन्नति के लिए कुछ नियमो का पालन करना पड़ता है. वो नियम हर जगह कुछ अलग होते है. ऐसे समय कुछ कर्मचारियों को बहुत ज्यादा इंतजार करना पड़ता है. 

ये सब अपने खुद के बिज़नस में नहीं होता है. ये भी एक कारण है जिसके आधार पर हम जॉब और बिज़नस में अंतर निकाल सकते है. 

Conclusion :- निष्कर्ष कुछ इस तरह से निकलता है की, जॉब करने वाले व्यक्ति को अपनी कोई भी आजादी नहीं होती है. वही पर उसे कुछ नियमो का पालन करना पड़ता है. अपनी पदोन्नति का रास्ता देखना पड़ता है. यही करना है की बिज़नस को जॉब से बेहतर माना जाता है. इस पोस्ट के मध्यम से जो जानकारी हमारे द्वारा आपको दी गयी है आशा करते है आपको वो अच्छी लगी होगी.

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