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Interesting Facts about Indian Politics In Hindi – दिलचस्प फैक्ट

Interesting Facts about Indian Politics In Hindi - Bharatiya Rajniti के दिलचस्प फैक्ट


Indian Politics इस शब्द का इतना प्रभाव India पर है, जितना की सूर्य का पृथ्वी पर है.  इस लेख में indian politics in hindi इस विषय पर चर्चा होगी. Indian Gappa इस ब्लॉग का जन्म ही India के लिए हुआ है. about Indian Politics इसको जानना हमारे लिए बहुत जरुरी है.

भारतीय शासन और राजनीति के जानकारों की माने तो indian politics history ये अपने आप में बहुत रहस्य छुपाये हुए है. nature of indian politics in hindi एक ऐसा विषय है जो अपने आप में एक विस्तृत विषय है. आपको इस लेख में about Indian Politics जानने के लिए मिलेगा. 

जब भी हम Politics के बारे में सोचते है कही चर्चा करते है. तब सबसे पहले हमारे जहन में एक नेता का छबि बनती है. क्योकि राजनीती को हम इससे ज्यादा जान ही नहीं पाये है. 

इस लेख में हम आपको Interesting Facts about Indian Politics बताने वाले है. लेकिन उससे पहले राजनीति क्या है ? से लेकर भारतीय राजनीती क्या है ? ऐसे सवालो के जवाबो के साथ आपको उन फैक्ट्स के बारे में भी जानकारी दी जाएगी.




Table of Contents Covered In This Post by Indian Gappa

  • What Is Politics In Hindi ?
  • What is Indian Politics ?
  • Indian Politics History In hindi - भारत का राजनीतिक इतिहास
  • Nature of Indian Politics In Hindi - भारतीय राजनीति की प्रकृति
  • Indian Politics - Role in World Politics 
  • Recent Developments In Indian Politics In Hindi
  • Importance of Politics In Hindi – About Indian Politics 
  • Relation of Indian Government and Politics In Hindi - भारतीय शासन और राजनीति
  • Interesting Facts about Indian Politics In Hindi by Indian Gappa


तो आईये शुरू करते है.....


What Is Politics In Hindi ?


राजनीती के बारे में यहाँ आपको बहुत ही सरल शब्दों में जानकारी मिलेगी. राजनीति ये दो शब्दों का मेल है. जिसमे पहला शब्द है “राज” और दूसरा शब्द है. “निति”. यहाँ पर “राज” अर्थात राज्य करना से है वही “निति” का अर्थ सही समय पर सही कार्य करने की कला से है.

राजनीती का इंग्लिश अनुवाद Politics होता है. राजनीतिक दर्शन के मान्यता के आधार पर राजनीतिक क्षेत्र में नितिगत सिद्धान्तों से जो व्यक्ति समझौता नहीं वो व्यक्ति राजनीती में “राजनेता” कहलाता है. इंग्लिश में उसे Statesman कहा जाता है.

हमारे देश में राममनोहर लोहिया, लाल बहादुर शास्त्री, अटल बिहारी वाजपेयी, अभी वर्तमान समय में नरेन्द्र दामोदरदास मोदी ये “राजनेता” कहे जा सकते है. जिनकी विचारधारा जनता पर अपना प्रभाव डालती है. 

साधारणतः राजनीती उसे कहा जाता है जिसमे किसी निति को अपनाकर किसी निश्चित पर राज किया जाता है. सरल शब्दों में कहे तो नागरिको के सर्वांगीं विकास के स्तर को ऊँचा उठाना ही राजनीती है. 

यदि इसे और संक्षेप में कहे तो प्रशासन के पदों को प्राप्त करके और सरकारी पदों का इस्तेमाल करने की कला को राजनीती कहा जाता है.

रामायण के काल से ही राजनीति का प्रारंभ हो चूका था. महाभारत ये जो भारत का सबसे बड़ा महाकाव्य माना जाता है. इसमें Politics का सबसे अधिक विवरण मिलता है. जिसमे चौसर का खेल खेलकर पाण्डवों को हराने कि राजनीति हो या फिर चक्रव्यूह की रचना हो.

राजनीति के जनक के रूप में अरस्तु को जाना जाता है. साधारणतः देखा गया है की, लोगो के द्वारा राजनीती के लिए विचार बहुत नकारात्मक है. यह हमारे लिए दुर्भाग्य की बात है. हमें ये जान लेना चाहिए की Politics किसी भी समाज का एक अविभाज्य अंग है.

Politics में हर प्रकार के विचार पाये जाते है. इनके माध्यम से एक राजनितिक विचारधारा का जन्म होता है. राजनितिक विचारधारा को आगे बढ़ाने वाले व्यक्तियों को राजनितिक विचारक कहा जाता है. इंग्लिश में इन्हें Political Thinkers कहा जाता है. 

इनके प्रमुख कार्य में राजनीतिक विचारों को आगे बढाकर उसे सर्वव्यापी बनाने के लिए प्रयास करना, अपने विरोधियो के विचारो का विरोध, विधि निर्माण, आदि होता है.

Politics हर स्तरों पर होती है. ग्रामीण क्षेत्रो की पारंपरिक राजनीती, स्थानीय प्रशासन की राजनीती, प्रनुसत्तात्म्क अंतर्राष्ट्रीय स्तर की राजनीती जिसे हम विदेशनीति भी कह सकते है. 

राजनीति अपने अन्दर एक अति प्राचीन इतिहास को समेटे हुए है. जिसका वर्णन हमें सनातन धर्म के प्राचीन ग्रंथो में देखने को मिलता है. जिनमे रामायण, महाभारत ये ग्रन्थ प्रमुख है.

राजनीती के ऊपर की गयी महात्मा गांधी जी टिप्पणी कुछ इस तरह थी. जिसमे उन्होंने कहा था..

राजनीति ने हमें सांप की कुंडली के सामान तरह जकड़कर रखा है और इससे जूझने के सिवाय हमारे पास अन्य कोई रास्ता नहीं है. राजनीतिक संगठन एवं सामूहिक निर्णय के किसी ढांचे के बिना कोई भी समाज जीवित नही रह सकता

इसके लिए कुछ विचारको के द्वारा राजनीती की परिभाषाये दी गयी है. जिनका सम्पूर्ण निचोड़ निकल कर हमारे द्वारा एक परिभाषा बनायीं गयी है. जो आपको राजनीती का सही अर्थ समझाने में समर्थ होगी, ये आशा है. 

Definition of Politics by IndianGappa :-

किसी भी समाज के कठिन पहलुओ को सरल रूप प्रदान करने वाली मानवीय अधिकारों व मानवीय कल्याणकारी तकनीक को राजनीति कहा जाता हैं


What is Indian Politics ? 


Indian Politics (भारत की राजनीति) हमारे Indian Constitution (भारतीय संविधान) के ढाँचे में कार्य करती हैं. जिसमे राष्ट्रपति देश का महामहिम होते हैं और प्रधानमंत्री कार्यपालिका का प्रमुख होता हैं.

भारत देश संघीय संसदीय, लोकतांत्रिक गणतंत्र हैं. भारतीय शासन प्रणाली एक द्वि-राजतन्त्र के आधार पर चलता है. जिसके अंतर्गत केन्द्र सरकार केन्द्रीय सत्ता वाली और राज्य सरकार उसके निचे कार्य करती है.

Constitution of India में संसद में दो सदनों का प्रावधान हैं. जिसमें प्रमुख सदन (राज्य सभा) जो भारतीय संघराज्य तथा केन्द्र-शासित प्रदेश का प्रतिनिधित्व करता हैं. (लोक सभा) जो दूसरा सदन और निचला सदन जो भारतीय की जनता प्रतिनिधित्व करता हैं. 

इन दोनों ही सदनों सबसे लोकप्रिय सदन लोकसभा होता है. क्योकि ये जनता के द्वारा निर्वाचित सदन होता है.

सरकार के हाथ में ही शासन एवं सत्ता की सम्पूर्ण बागडोर होती है. सयुक्त संविधानिक बागडोर सरकार और संसद के दोनों सदनों अर्थात LokSabha एवं RajyaSabha के हाथ में होती है. 

लेकिन न्यायपालिका को कार्यपालिका और सरकार  दोनो से स्वतंत्र रखा गया है. जिससे न्याय प्रदान करने में कोई रूकावट न आये. जिससे न्यायप्रणाली सुचारू रूप से चलती रहे.

भारतीय संविधान के अनुसार भारत को एक समाजवादी, धर्म-निरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य का दर्जा है. जनता के द्वारा सरकार को चुना जाता है. भारत में संयुक्त सरकार होती है. लेकिन राज्य सरकारों की तुलना में केन्द्र सरकार अधिक शक्तिशाली है.

भारत की संसदीय प्रणाली ब्रिटेन की संसदीयप्रणाली पर आधारित है. यदि किसी सरकार की बहुमत की स्थिति में न होने पर ये एक विशेष संविधानिक परिस्थिति होती है. जिसमे केन्द्र सरकार राज्य सरकार को निष्कासित कर सकती है. 

जिसे राज्यपाल के द्वारा निर्धारित किया जाता है. अगर परिस्थितिया फिर भी न बने तो सीधे संयुक्त शासन लागू कर किया जाता है. जिसे राष्ट्रपति/राज्यपाल शासन कहा जाता है. ऐसी स्थिति वर्तमान राजनीती में महाराष्ट्र में देखी गई थी. 

Indian Politics का समूचा खेल मंत्रियों के द्वारा निर्धारित होता है. भारत ऐसा देश है, जहां युवाओं का चुनाव में बहुत विस्तृत वोटिंग बैंक है. चुनाव को भारत में एक लोकतांत्रिक पर्व की तरह मनाया जाता है. 

Indian Politics किसी राज्य में नीति को सुचारू करने की तरह है.

भारतीय राजनीति एक ऐसी राजनीति है जो वर्तमान में लोकतंत्र के सर्वोत्कृष्ट पायदान पर है. जिसमें भारत के व्यक्ति को समानता अधिकार प्रदान करने के लिए निर्वाचन होता है. कुछ वर्षो पहले विदेशो के लिए भारत की राजनीति एक बाजार की तरह मानी जाती थी लेकिन वर्तमान सरकार के दौर में इसमें पारदर्शिता आयी है. 

भारत देश लोकतान्त्रिक देश है. लेकिन जब इस देश में लोकतंत्र का महत्व कम होता दिखाई पड़ रहा था. लोकतंत्र के सही मायने लागु करने के लिए क्रमबद्ध तरीके से लोकतान्त्रिक चुनाव जरुरी होता है.

Indian Politics इस लोकतान्त्रिक मायने को पूरा करती है. लेकिन कुछ जगहों पर देखा जाये तो स्वहित के लिए जनता को आगे किया जाता है और जनता के नाम पर सम्पूर्ण लाभ खुद लिया जाता है. ऐसे कुछ अपवाद भी सामने आते है. 

भारत में राजनीति केवल नाममात्र के लिए रह गयी है. वर्तमान भारत में राजनीति के सम्पूर्ण अर्थ को बदल कर रख दिया गया है. राजनीती का सही अर्थ है “राज्य नीति” जिससे राज्य को सुचारू रूप में चलाया जा सके. 

Indian Politics में Politics के सम्पूर्ण अर्थ को बदल कर रख दिया गया है. आज राजनीती शब्द से लोगो को चिढ होती जा रही है. ऐसा क्यों हो रहा है. इस बारे में विचार करना आवश्यक है.

इसके लिए आगे कुछ मुद्दों पर चर्चा करना चाहिए.


Indian Politics History In Hindi - भारत का राजनीतिक इतिहास


Indian Politics History में आपको भारत के स्वतंत्रता के बाद याने सन 1947 के बाद भारत का राजनीतिक इतिहास अपने आप में बहुत सी रहस्य को समेटे हुए है और इसका एक विस्तृत इतिहास है. आपको Indian Politics History को संक्षिप्त में बताया जा रहा है.


भारत का पहला चुनाव (सन 1951-52)


हमारे स्वतंत्र भारत में 25 अक्टूबर 1951 से लेकर 21 फरवरी 1952 तक आयोजित 1951-52 का भारतीय आम चुनाव माह अगस्त 1947 में भारत के स्वतंत्र होने के पश्चात लोकसभा का पहला चुनाव था.

भारत के प्रथम साधारण चुनाव के बाद 17 अप्रैल 1952 को भारत में पहली लोकसभा का गठन हुआ. पहली लोकसभा 4 अप्रैल 1957 तक पांच वर्षों के अपने पूर्ण कार्यकाल तक चली.

इस First LokSabha का पहला सत्र 13 मई 1952 को प्रारंभ हुआ था. नेहरू भारत के पहले प्रधानमंत्री बने.


नेहरू की मृत्यु के बाद राजनीति में भारी बदलाव आया 


जवाहरलाल नेहरू की मृत्यु 27 मई 1964 को दोपहर 02:00 मृत्यु को हुई. माना जाता है की उनकी मौत का कारण दिल का दौरा है.

नेहरू की मृत्यु के बाद Indian Politics में भारी बदलाव आया. फरवरी 1967 में चौथे आम चुनाव में कांग्रेस केवल 54 प्रतिशत सीटे ही हासिल कर पाई. उसीके अगले महीने बहुत से राज्यों में गैर-कांग्रेसी मंत्रालयों की स्थापना हुई. इनमे केरल, बिहार, मद्रास, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल और पंजाब शामिल थे.

आगे अप्रैल में राजस्थान को राष्ट्रपति शासन शासन में लाया गया. वैसे ही उत्तर प्रदेश में कांग्रेसी सरकार जो गठबंधन सरकार थी उसका भी का पतन हो गया. ऐसा करते करते आगे कांग्रेस (ओ) का दो गुटों में विभाजित कर दिया.


इंदिरा गांधी का उदय


नेहरू के देहांत के बाद इंदिरा गांधी तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के प्रेरणा पर चुनाव लड़ीं थी. 

भारत-पाकिस्तान के बिच जब 1965 का युद्ध चल रहा था तब Indira Gandhi श्रीनगर सीमाक्षेत्र में स्वत उपस्थित थी. तत्कालीन प्रधानमंत्री लालबहादुर ताशकंद में पाकिस्तान के अयूब खान के साथ सोवियत मध्यस्थता के शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने के कुछ घंटे बाद लालबहादुर शास्त्री की मृत्यु हो गयी.

तब सन 1966 में इंदिरा गांधी भारत की प्रधानमंत्री बनी.  वे भारत की पहली महिला प्रधान मंत्री थी. प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने अपनी अमित छाप भारत की जनता के मन में छोड़ी.


लोकनायक जेपी आंदोलन - “सम्पूर्ण क्रांति”


जयप्रकाश नारायण जिनका संक्षिप्त नाम “जेपी” कहा जाता है. वे एक भारतीय स्वतंत्रता सेनानी और राजनेता थे. जयप्रकाश नारायण ये इंदिरा गांधी की प्रशासनिक नीतियों के विरोधी थे. 

इंदिरा गांधी जैसे बड़े राजनेता और तत्कालीन प्रधानमंत्री के विरुद्ध विपक्ष का सफल नेतृत्व करने के लिए जयप्रकाश नारायण को जाना जाता है. उन्होने “सम्पूर्ण क्रांति” नामक आन्दोलन चलाया था. उनके समाज सेवा को देखते हुए लोग उन्हें “लोकनायक” भी कहते थे. 

जय प्रकाश नारायण के “सम्पूर्ण क्रांति” आन्दोलन ने इतना विकराल रूप धारण किया था जिससे केन्द्र की कांग्रेस सरकार को सत्ता गवानी पड़ी थी. 

जेपी की आवाज पर नौजवानों की भीड़ सड़कों निकल जाती थी. जयप्रकाश नारायण देश के हर घर में क्रांति का पर्याय हो चुके थे.

बिहार से उठी “सम्पूर्ण क्रांति” की चिंगारी धधकती आग बनकर देश के हर हिस्से भड़क गयी. बिहार के बहुत से प्रमुख नेता जैसे लालू प्रसाद, सुशील मोदी, रामविलास पासवान, नीतीश कुमार, थीलालमुनि चौबे उसी छात्र युवा संघर्ष वाहिनी का हिस्सा रह चुके है.


जनता पार्टी (1977)


सन 1975 - 1976  के बिच प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लागू राष्ट्रिय आपातकाल के बाद जनसंघ के साथ भारत के प्रमुख दलों ने मिलकर एक नए दल का गठन किया जिसका नाम “जनता पार्टी” रखा गया. सन 1977 से 1980 जनता पार्टी भारत सरकार का नेतृत्व करती रही. लेकिन बाद में इनके आंतरिक मतभेदों के चलते जनता पार्टी सन 1980 में विभाजित हो गयी.

Indian-Politics-History-In-Hindi



इंदिरा की वापसी (1980)


सन 1980 में भारत में सातवें आम चुनाव हुआ. इंदिरा गांधी ने सन 1975 - 1976 के आपातकाल के बाद जनसमर्थन खो दिया था. वो वापिस पा लिया. इसी आम चुनाव में वे पुन प्रधानमंत्री बनी. लेकिन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का सातवीं लोकसभा का कार्यकाल उनकी दर्दनाक हत्या का जीता जगता गवाह बना.


राजीव गाँधी का युग 


दिनक 31 अक्टूबर 1984 को प्रधानमंत्री श्रीमती इन्दिरा गांधी की हत्या उन्ही के अंगरक्षक के की गयी. उसके बाद राजीव गाँधी को भारत के प्रधानमंत्री निर्वाचित हुए.

1. राजीव गाँधी का युग Indian Politics में एक स्वर्ण युग माना जाता है. 

2. भारत में सूचना क्रांति के जनक राजीव गाँधी ही माने जाते हैं. 

3. देश के कंप्यूटराइजेशन क्रांति का श्रेय उन्हें जाता है.

4. टेलीकम्युनिकेशन क्षेत्र की क्रांति का श्रेय उन्हें जाता है.

5. राजीव गाँधी ने देश में महिलाओं को स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं में 33 प्रतिशत रिजर्वेशन दिलवाने का कार्य किया.

6. राजीव गाँधी ने 18 वर्ष तक के युवाओं मतदाताओ को चुनाव में वोट देने का अधिकार दिलवाया जो पहले 21 वर्ष हुआ करता था.

7. भारत में पंचायतीराज का विस्तार राजीव गाँधी के कार्यकाल में हुआ था.

लेकिन सन 21 मई, 1991 में राजीव गाँधी की हत्या तमिल आतंकवादी संगठन लिट्टे के सदस्य प्रभाकरन और नलिनी ने एक बम विस्फ़ोट के द्वारा कर दी. राजीव गाँधी की हत्या के बाद भारत के स्वर्ण युग का अंत हो गया था जो अपनी सफलता की और अग्रसर था


कांग्रेस की प्रभुसत्ता प्रणाली का अंत (1989)


सन 1989 में हुए आम चुनाव में कांग्रेस की हार से कांग्रेस के प्रभुत्व का अंत कर दिया. इसके बाद भी कांग्रेस ने Indian Politics को प्रभावित करना जारी रखा 

1. सन 1991 के मध्यावधि चुनाव में बाद कांग्रेस ने अपने प्रदर्शन में सुधार किया इसके साथ ही वो सत्ता में वापस प्राप्त करने में समर्थ रही थी. 

2. सन 1996 में गैर-कांग्रेसी सरकार को समर्थन देना लेफ्ट ने जारी रखा था. लेकिन बाद में कांग्रेस को इसका समर्थन करने के लिए बाध्य होना पड़ा. क्योंकि कांग्रेस, लेफ्ट के साथ बीजेपी को सरकार में प्रवेश नहीं देना चाहते थे.

4. फिर भी कांग्रेस Indian Politics में एक महत्वपूर्ण पार्टी बनी रही. लेकिन सन 1989 के बाद धीरे धीरे कोंग्रेस पार्टी केंद्रीय सत्ता में सम्पूर्ण प्रभुसत्ता को खोती चली गयी.


भारत की राजनीति में गठबंधन वर्ष 


सन 1996-1998 भारत की राजनीति में गठबंधन वर्ष कहा जाता है. इस समय से ही भारत में गठबंधन की सरकारे बनाने लगी थी. ये अल्पमत सरकारें संसदीय व्यवस्था की उस नाकामी का नतीजा थी.

संसदीय प्रणाली में जब कोई राजनितिक दल अपना बहुमत सिद्ध न कर पाये ऐसे स्थिति सन 1996-1998 के पहले कभी नहीं आयी थी. लेकिन इस समय में गठबंधन एव अल्पमत सरकारें बनाने का दौर शुरू हो चूका था. 

क्योकि सरकार बनाने के लिए लोकसभा में पूर्ण बहुमत सिद्ध करने में कोई भी राजनितिक दल असमर्थ था. जिससे इस परिस्थिति में गठबंधन एव अल्पमत सरकारो ने जन्म लिया.


नरेन्द्र मोदी की जादुई लहर (2014-2020) 


सन 2014 के लोकसभा चुनाव मे नरेन्द्र मोदी की जादुई लहर ने भारतीय राजनीती को एक नया मोड़ दे दिया है. जिसे मोदी युग कहने में कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी. 

इस LokSabha Election के बाद एक सम्पूर्ण बहुमत की सरकार भारत को मिली. जो की बड़े फैसले लेने में सक्षम थी. उसी तर्ज पर उनके द्वारा काफी अच्छी फैसले लिए गए. 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वतंत्र भारत देश के विश्वसनीय और महान जननायक के रूप में उभरकर आये. 

इस प्रकार Indian Politics में नरेन्द्र दामोदरदस मोदी एक ऐसा नाम बन गया है जिसके इर्द-गिर्द सम्पूर्ण भारतीय राजनीती घुमती नजर आ रही है.


Nature of Indian Politics In Hindi - भारतीय राजनीति की प्रकृति


Nature of Indian Politics को समझने के लिए हमें Indian Politics सम्पूर्ण इतिहास पर नजर डालने की जरुरत है. जिसमे उसके समयानुकूल बदलाव आते चले गए है. इस प्रकार दे बदलाव को देखते हुए उसकी प्रकृति के बारे में अंदाजा लगाया जा सकता है.

भारतीय राजनीति की प्रकृति के बारे में हम कुछ मुद्दों के माध्यम से आपको बता सकते है.

1. Indian Politics का Nature सत्ता मूलक है. जो सत्ता के इर्द गिर्द घूमता दिखाई देता है. उसके साथ ही जनहितार्थ को पूरा करना इसका लक्ष्य हुआ करता है.

2. भारतीय राजनीती किसी राजनेता के ऊपर भी आधारित दिखाई देती है. जो अपने दौर में अपने विशेष विचारप्रणाली के लिए जाने जाते थे. वर्तमान में नरेन्द्र मोदी उसका अच्छा उदाहरन है.

3. Indian Politics हर बार एक विचारधारा के साथ साथ बदलाव पसंद नजर आती है. जो कालांतर में दुर्सरी विचारधारा को अपनाने के लिए आतुर दिखाई देती है.

4. वर्तमान भारतीय राजनीती के लिए कहा जा सकता है की ये केवल और केवल सत्ता के लिए लालाहित है और उसी के लिए की जा रही है. क्योकि सत्ता के लिए राजनितिक दलों के बदलते सिद्धांत और विचारधारा को देखकर इसे स्पष्ट किया जा सकता है.


Indian Politics - Role in World Politics 


भारत विगत वर्षो में एक शक्तिशाली राष्ट्र बनकर उभरा है. भारत की राजनितिक शक्ति में वृद्धि से कुछ अटकलों के साथ कुछ उम्मीदों को भी जन्म दिया है, जिसमे कि यह कहा जाता है की भारतीय राजनितिक व्यवस्था वैश्विक व्यवस्था बदलकर रखने में सक्षम है. 

वही एक सिरे पर भारत एक विशाल देश है. जिसमें 1.3 बिलियन से अधिक जनता निवास करती है. और भारत दुनिया की तीसरी सबसे विशाल अर्थव्यवस्था बनने की राह पर अग्रसर है. तो दुसरे सिरे पर भारत के अधिकांश लोग भी गरीबी से जूझ रहे है और भारत विकासशील अर्थव्यवस्था की अन्य चुनौतियों से लोहा ले रहा है. 

भारतीय लोकतंत्र दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और सबसे विविध लोकतंत्र है. लेकिन यूरोपीय देश में इन मूल्यों को बढ़ावा देने में संकोच करते है. बहुत से देश है भारत के उदय समर्थन करते है. जिनमे संयुक्त राज्य अमेरिका प्रमुख है. 

इन सभी पहल के लिए भारत की राजनीती कही न कही जिम्मेदार है. Indian Politics वर्तमान समय में सम्पूर्ण विश्व में छाई रहती है. हमारे देश के लोग जो विदेशो में रहकर भी भारतीय राजनीती में अच्छी दिलचस्पी दिखाते है.

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वर्तमान समय में भारत की छबि अंतराष्ट्रीय परिदृश्य में उभर कर आयी. जिसमे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इनका भी विशेष योगदान रहा है. जिनके वाक्चातुर्य और बहुमुखी प्रतिभा के कारण ही ये संभव हो सका है.


Recent Developments In Indian Politics In Hindi


Indian Politics का इतिहास काफी प्राचीन माना जाता है. लेकिन वर्तमान परिदृश्य में भारतीय राजनीति में नए बदलाव आये है. 

इस सेक्शन में Recent Developments In Indian Politics जिन्हें जान लेना राजनीती में रूचि रखने वाले हर व्यक्ति के लिए आवश्यक है. 

आपको bhartiya rajniti mein naye badlav को कुछ मुद्दों के माध्यम से बताने की कोशिश करते है. 

1. भारतीय राजनीती का स्तर पहले के मुकाबले काफी सुधरा है. जिसका प्रमुख कारण शिक्षा क्षेत्र में हुआ विकास है.

2. भारतीय मतदाता ही Indian Politics को प्रभावित करता है. इसीलिए वोटर्स के बदलते रुख को देखते हुए, भारतीय राजनीती भी करवट बदलती नजर आती है.

3. आज से कुछ वर्षो पढ़े भारतीय राजनीती लोकतंत्र के सबसे बड़े पर्व कहे जाने वाले चुनाव में जो खर्च का अनुमान लगाया जाता है. उसके आधार पर ये कहा जाता सकता है, की Indian Politics कभी घाटे का सौदा नहीं हो सकती है.

4. सन 2014 के चुनाव और उसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में भारतीय राजनीती में युवाओ के बढ़ते दिलचस्पी को देखकर यही कहा जा सकता है, की भारतीय राजनीती में आमूलाग्र परिवर्तन का यह एक स्वर्णिम दौर है.


Recent-Developments-In-Indian-Politics


5. ये कहा जाता है की जिस देश का युवा राजनितिक फैसलों में दिलचस्पी लेने लगे उस देश को महाशक्ति बनाने से कोई नहीं रोक सकता है.

6. आज के डिजिटल ज़माने में Indian Politics में भी डिजिटल दौर आ गया है. जिसमे प्रचार के माध्यम के रूप में सोशल मीडिया एक अच्छा साधन बनकर सामने आया है. Social Media में फेसबुक, WhatsApp इनका प्रमुख नाम सामने आता है. 

7. सोशल मीडिया का उपयोग Indian Politics में लोगो का रुझान जानने से लेकर चुनाव के परिणाम तक को प्रभावित करने का सामर्थ्य है. लेकिन इसका दुरूपयोग भी काफी किया जाता है जिससे राजनितिक वैमनस्य बढ़ने की घटनाये भी सामने आयी.

8. पुराने दौर में राजनीती के प्रमुख स्तम्भ में रूप में मीडिया प्रमुखतः समाचारपत्रों का मुख्य योगदान होता था. परन्तु आज के Electronic Media के दौर में इनका महत्त्व भारतीय राजनीती में काफी कम हो गया है.

9. राजनितिक पार्टियों की देखे तो गली-गली में पार्टियों के निर्माण की खबरे आती है. दलबदल को तो आजकल फैशन बना दिया गया है. ये Indian Politics का एक कला सच है.

10. राजनितिक दल अपना हित पहले बाद में जनता का हित देखने लगे है. जिसका सीधा असर हमारे विकास पर पड़ता है. इस प्रकार की गतिविधिया राजनिति के मूल सिद्धांत को ठेस पहुचती है.


Importance of Politics In Hindi – About Indian Politics 


indian politics in hindi इस लेख में आपको राजनीती के बारे में जानकारी देने के कड़ी में अब बारी है. Importance of Indian Politics इस विषय की.

तो आईये जान लेते है भारतीय राजनीती के महत्व के बारे में...

1. भारतीय राजनीती सम्पूर्ण देश को सुचारू रूप से चलाये रखने में जरुरी है. जिसके स्तर में सुधार की जरुरत तो है, लेकिन अपने आप में वो भारतीय लोकतंत्र में एक अलग स्थान रखती है.

2. कुछ अपवाद को छोड़ दिया जाये तो Indian Politics में कुछ ऐसे राजनेता हुए है जिनका लोहा सम्पूर्ण विश्व ने माना है. जिसमे नेहरु, लालबहादुर शाश्त्री, इंदिरा गाँधी, मोरार जी देसाई, लोकनायक जयप्रकाश नारायण, राजीव गाँधी, मनमोहन सिंह आदि राजनेता शामिल है. 

3. ऐसे राजनेताओ की राजनितिक विचारधारा से भारतीय जनता में राजनितिक जाग्रति का निर्माण होता है. जिसका जीता जगता उदाहरन वर्तमान में नरेन्द्र मोदी के रूप में आपके सामने है.

4. Indian Politics का महत्त्व हर एक उस भारतीय के मौलिक अधिकारों में दिखाई देता है. जो आज संविधान के आधार पर अपनी मौलिक अधिकार प्राप्त कर रहा है. जो भारतीय राजनीती की ही देन है.
इसीलिए भारतीय राजनीती के महत्व को हमें समझना जरुरी है. एक अच्छी राजनितिक विचारधारा ही किसी भी देश को विकास की ओर अग्रसर कर सकती है. जिसमे Indian Politics बहुत हद तक सफल रही है.   


Relation of Indian Government and Politics In Hindi - भारतीय शासन और राजनीति


किसी भी देश की Government और वहा की Politics एक दुसरे को प्रभावित करे बिना नहीं रह सकती है. सरकार और राजनीती का चोली दामन का साथ है. जो कभी भी छुट नहीं सकता है.

प्रत्यक्ष हो या परोक्ष हो कैसे न कैसे, किसी न किसी प्रकार राजनीती, सरकार को प्रभावित जरुर करती है. या फिर सरकार के निर्णयों से प्रभावित होती है. दोनों ही एक दुसरे के प्रभाव में रहती है.

वैसे ही Indian Politics भी Indian Government को प्रभावित करे बिना कैसे रह सकती है. सरकार के बहुत से निर्णयों को भारतीय राजनीती प्रभावित करती है. इसका सबसे ज्यादा असर गठबंधन की सरकारों में देखा जाता रहा है.

सम्पूर्ण बहुमत की सरकारों में इसका प्रभाव कम रहा है. क्योकि गठबंधन की सरकारे अपनी सरकार को बचाने के लिए कुछ सख्त निर्णय लेने में असमर्थ महसूस करती रही है. जिसका सीधा मतलब ये है की भारतीय राजनीती सरकार के निर्णयों को प्रभावित करती रही है.

विगत वर्षो सन 2014 से 2020 तक जब मई ये लेख लिख रहा हु तब तक भारत में पूर्ण बहुमत की सरकार केंद्र में बन रही है. जो केंद्र की बागडोर संभाले हुए है. 

इस कालखंड में सरकार के द्वारा बहुत से कड़े निर्णय लिए गए है. जिसमे नोटबंदी, तिन तलाक, धारा 370 का हटाया जाना, बेंको का विलनिकरण ऐसे बहुत से सराहनीय फैसले लिए है. 

लेकिन फिर भी भारत एक संघराज्य है. जिसमे 29 राज्य शामिल है. राज्यों में अलग विचारधारा की सरकार होने से थोडा सा प्रभार केंद्र पर हो होता ही है. जिसके माध्यम से सरकार के निर्णय कुछ मात्रा में प्रभावित होते है. 

जिस समय मेरे द्वारा ये लेख लिखा जा रहा है, तब हमारा भारत देश कोरोना (Korona) की महामारी से लड़ रहा है और मुझे पूरा विश्वास है की हम ये जंग जरुर ही जित जायेंगे.    


Interesting Facts about Indian Politics In Hindi by Indian Gappa 


भारतीय राजनीती के लिए भारतीय जनता के मन में बहुत चिढ निर्माण हो चुकी थी. जिसका सबसे बड़ा करना राजनितिक नेताओ के किये गये जनता के पैसो का गबन था. ऐसे ऐसे घोटालो की खबरे हमें सुनाई पड़ रही थी जिसके बारे में हम सोच भी नहीं सकते है.

इस सभी के बिच भारतीय राजनीती में एक नया मोड़ आया जो सन 2009 से रामदेव बाबा के भारत स्वाभिमान यात्रा से लेकर अन्ना हजारे इनके आमरण अनशन और केजरीवाल के मुख्यमंत्री बनाने के बाद भी नहीं रुका. 

उसके बाद सन 2014 में नरेन्द्र मोदी के भारत के प्रधानमंत्री बनाने तक ये सिलसिला कायम रहा. आज सन 2020 तक ये भारतीय राजनीती के सबसे अच्छे दौर कहा जा रहा है. 

जिसमे राम मंदिर जैसे प्रलंबित मुद्दों को सुलझाया जा चूका है. जो कोई भी सरकार बोलने से कतराती थी. क्योकि ये एक धर्म पर आधारित मुद्दा था. इसमें हमारे द्वारा किसी भी राजनितिक दल का पक्ष नहीं रखा जा रहा है. लेकिन ये Indian Politics की जित ही कही जानी चाहिए.


Interesting-Facts-about-Indian-Politics-In-Hindi


इसी के साथ हमें Bharatiya Rajniti के दिलचस्प फैक्ट के बारे में जान लेना चाहिए जो हमारा आज का मुख्य विषय था. जो कुछ इस प्रकार है.

1. भारतीय राजनीती का दिलचस्प फैक्ट ये रहा है, की ये ज्यादातर किसी न किसी राजघराने के इर्द गिर्द ही घुमती रही है. ये अब इसका एक काला सच कहा जाये या फिर इसका दुर्भाग्य ये आप ही निश्चित करे.

2. Indian Politics में हमेशा ही विशिष्ठ जानो का बोलबाला रहा है. लेकिन कुछ ऐसे भी नेता हुए है. जो अपने जमीन से जुड़े होने के बल पर ही भारतीय राजनीती में अपना लोहा मनवा चुके है. जिसमे लालूप्रसाद यादव, नितीश कुमार इन जैसे नाम प्रमुख है.

3. प्राचीन राजनितिक इतिहास में भारत के लिए जो घराने राजनीती में सक्रीय थे, उनके ही वारिसो ने भारतीय राजनीती पर कब्ज़ा किये हुए नजर आते है. ऐसा सभी राजनितिक दलों और सरकारों में दिखाई देता है.

4. नेता का बेटा नेता इस परंपरा को राजनीती में अभी भी भुनाया जा रहा है. क्योकि इनके ऊपर किसी की लगाम नहीं है. जनता ही इनके ऊपर लगाम लगा सकती है.

5. भारतीय राजनीती का एक तथ्य ये भी है की, जनता के राजनेता याने जनता के लिए कार्य करने वाले राजनेता हर बार किसी न किसी हादसे के शिकार जरुर होते है. जिनका रहस्य आज भी सुलझाया नहीं जा सका है. ये एक काला तथ्य है, लेकिन सच है. 


Conclusion :-

Indian Politics के बारे में लिखे इस लेख में Indian Politics के Interesting Facts याने दिलचस्प फैक्ट के साथ ही Indian Politics History, Nature of Indian Politics, Role in World Politics, Recent Developments In Indian Politics, Importance of Politics, Relation of Indian Government and Politics इन सभी मुद्दो के सार्थक चर्चा की गयी. जिसके निष्कर्ष रूप ये यही कहा जा सकता है, की "Indian Politics एक ऐसा गर्म लोहा है जो हर समय हथोड़े के इंतजार में रहता है"


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