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शिक्षा का अर्थ - शिक्षा की परिभाषा क्या है - Shiksha In Hindi

शिक्षा की परिभाषा क्या है - शिक्षा का अर्थ - Shiksha In Hindi


शिक्षा व्यक्ति को अच्छा व्यक्तित्व प्रदान करती है. शिक्षा का अर्थ और शिक्षा की परिभाषा क्या है. इस लेख Shiksha In Hindi के माध्यम से आपको बताने वाले है. शिक्षा एक व्यापक विषय है. जिसमे ज्ञानग्रहण, तकनीकी शिक्षण के साथ उचित आचरण और विद्या अर्जन का समावेश होता है. 

आज के इस लेख में आपको शिक्षा का अर्थ का विस्तृत अध्यन मिलेगा. उसी प्रकार शिक्षा की परिभाषा क्या है के बारे में जानेंगे.  


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शिक्षा की परिभाषा क्या है


Table of Contents Covered In This Post by Indian Gappa

  • शिक्षा का अर्थ : विस्तृत अध्यन के साथ 
  • शिक्षा की परिभाषा क्या है : प्रमुख विचारको की परिभाषाए 
  • मनीष सिसोदिया (दिल्ली मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री) के शिक्षा के बारे में विचार 
  • शिक्षा की परिभाषा क्या है : इंडियन गप्पा के अनुसार परिभाषा 

तो आईये जानते और सीखते है.....!



शिक्षा का अर्थ : विस्तृत अध्यन के साथ 


शिक्षा का अर्थ सही मायने में समझे तो, शिक्षा हमारे मानसिक तथा नैतिक विकास के साथ ही हमारे कौशल और व्यापारी विकास पर केन्द्रित होती है. शिक्षा हमारे समाज में पीढ़ी दर पीढ़ी अपने ज्ञान और समझ को हस्तांतरण का सफल प्रयास है. 

शिक्षा व्यक्ति को समाज से जुड़ने सहायता करती है. सामाजिक की निरंतरता बनाए रखती है. शिक्षा एक संस्था की तरह कार्य करती है. 

एक बालक जिसे हम विद्यार्थी ही मान ले जो अपनी प्रारंभिक शिक्षा में किसी समाज विशेष के व्यवस्थाओं, समाज के प्रतिमानों एवं मूल्यों, आधारभूत नियमों को सीखने का कार्य करता है. 

इस प्रकार वो बालक समाज इसीलिए अपनी अंतरात्मा से जुड़ पाता है क्योकि वह उस समाज विशेष के इतिहास से परिचित होता है.

शिक्षा के द्वारा किसी भी व्यक्ति के अन्दर की क्षमता तथा उसके व्यक्ति के व्यक्तित्व को विकसित करने का कार्य किया जाता है. यही प्रक्रिया उसे समाज के एक जिम्मेदार सदस्य बनने के लिए मदत करती है. शिक्षा व्यक्ति को आवश्यक ज्ञान तथा कौशल उपलब्ध कराती है. 

शिक्षा का अर्थ जानने की पहले ‘शिक्षा’ शब्द का निर्माण जान लेना जरुरी है. शिक्षा शब्द संस्कृत भाषा की ‘शिक्ष्’ धातु में ‘अ’ प्रत्यय जोड़ने से बना है. 

‘शिक्ष्’ का अर्थ सीखना और सिखाना होता है. इसी प्रकार ‘शिक्षा’ शब्द “सीखने-सिखाने की क्रिया” से तात्पर्य रखता है. 

हमारे द्वारा शिक्षा शब्द का प्रयोग दो रूपों में किया जाता है. प्रथम व्यापक रूप तथा द्वतीय संकुचित रूप. 


शिक्षा का व्यापक रूप में अर्थ 


व्यापक अर्थ में शिक्षा किसी भी समाज में निरंतर और सर्वदा चलते रहने वाली सामाजिक प्रक्रिया होती है. जिससे मनुष्य में उसकी जन्मजात शक्तियों का विकास, उसके ज्ञान वृद्धि, कौशल में वृद्धि और व्यवहार में सकारत्मक परिवर्तन को नियोजित किया जाता है. 

इस प्रकार से शिक्षा के द्वारा किसी मनुष्य को योग्य नागरिक बनाया जाता है. उसमे सभ्यता और अपनी संस्कृति के प्रति आदर निर्माण किया जाता है. 

अपने शिक्षाकाल में मनुष्य के द्वारा हर पल नविन अनुभव प्राप्त किये जाते है. जिससे उसमे प्रतिदन कुछ न कुछ नए विचार निर्माण होते है इससे उसका व्यवहार भी प्रभावित होता है. 

यह सीखना-सिखाना हमारे समाज की उत्सवों, विभिन्न समूहों, रेडियो, टेलीविजन पत्र-पत्रिकाओं आदि से अनौपचारिक रूप से होता है. यही सीखना-सिखाना की प्रकिया शिक्षा के व्यापक रूप लिए जाते है.

शिक्षा की परिभाषा के बाद आप हमारे ही ब्लॉग का -शिक्षा का उद्देश्य क्या है ? ये लेख जरुर पढ़े 

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शिक्षा का संकुचित रूप में अर्थ


शिक्षा का संकुचित रूप कुछ इस तरह से समझा जा सकता है की जो शिक्षा हमें हमारे विद्यालय, महाविद्यालय में दी जाती है जिसे संकुचित अर्थ में लिया जा सकता है.

किसी समाज में एक निश्चित समय की लिए तथा निश्चित स्थानों पर एक योजनात्मक तरीके से चलने वाली सोद्देश्य शिक्षा की प्रक्रिया संकुचित रूप में आती है. जिसमे इसे गृहण करने वाला विद्यार्थी कहलता है. 

वह विद्यार्थी किसी निश्चित पाठ्यक्रम के अभ्यास से संबंधित प्रक्रिया का हिस्सा बनता है और उस पाठ्यक्रम उत्तीर्ण करना सीखता है और उसमे सफल होता है.

शिक्षा-का-अर्थ
शिक्षा का अर्थ



शिक्षा की परिभाषा क्या है : प्रमुख विचारको की परिभाषाए


शिक्षा की परिभाषा को समझाने के लिए महान मनोवैज्ञानिकों, समाजशास्त्रियो व दार्शनिको के द्वारा शिक्षा के सम्बन्ध में अपने विचार और परिभाषाये बतलाई है. जो शिक्षा के अर्थ को समझने में हमारी सहायता करेगी. 

तो आइये कुछ शिक्षा सम्बन्धी प्रमुख विचारको की परिभाषाए बतलाई जा रही हैं :- 

महात्मा गांधी के द्वारा शिक्षा की परिभाषा :- 


“शिक्षा से मेरा तात्पर्य बालक, मनुष्य और मानव के शरीर, मन तथा आत्मा के सर्वांगीण एवं सर्वोत्कृष्ट विकास से है.”


जॉन ड्यूवी के द्वारा शिक्षा की परिभाषा :-


“शिक्षा व्यक्ति की उन सभी भीतरी शक्तियों का विकास है, जिससे वह अपने वातावरण पर नियंत्रण रखकर अपने उत्तरदायित्त्वों का निर्वाह कर सके.”


स्वामी विवेकानन्द के द्वारा शिक्षा की परिभाषा :-


“मनुष्य की अन्तर्निहित पूर्णता को अभिव्यक्त करना ही शिक्षा है.” 


Sarvepalli Radhakrishnan के द्वारा शिक्षा की परिभाषा :-


“शिक्षा व्यक्ति को और सामाजिक के सर्वतोन्मुखी विकास की सशक्त प्रक्रिया है.”


ब्राउन की शिक्षा की परिभाषा :-


“शिक्षा चैतन्य रूप में एक नियंत्रित प्रक्रिया है जिसके द्वारा व्यक्ति केव्यवहार में परिवर्तन किये जाते हैं और व्यक्ति के द्वारा समूह में.”


डॉक्टर थॉमस के अनुसार शिक्षा की परिभाषा :-


“शिक्षा भारत में विदेशी नहीं है , ऐसा कोई भी देश नहीं है जहां ज्ञान के प्रति प्रेम इतने प्राचीन समय में प्रारंभ हुआ हो या जिसने इतना स्थाई और सशक्त प्रभाव को उत्पन्न किया हो। वैदिक युग के साधारण कवियों से लेकर आधुनिक युग के बंगाली दार्शनिक तक शिक्षकों एवं विद्वानों की एक अविरल परंपरा रही है.”


सुकरात के अनुसार शिक्षा की परिभाषा :-


“शिक्षा का अर्थ है प्रत्येक मनुष्य के मस्तिष्क में अदृश्य रूप में विद्यमान संसार के सर्वमान्य विचारों को प्रकाण में लाना.”


हर्बट स्पैन्सर के द्वारा शिक्षा की परिभाषा :-


“शिक्षा का अर्थ अन्तःशक्तियों का बाह्य जीवन से समन्वय स्थापित करना है.”


जिद्दू कृष्णमूर्ति के द्वारा शिक्षा की परिभाषा :-


“शिक्षा व्यक्ति के समन्वित विकास की प्रक्रिया है.”


Thomas Edison के अनुसार शिक्षा की परिभाषा :-


“शिक्षा मानव मस्तिष्क को प्रभावित करती है तब वह उसके प्रत्येक गुण को पूर्णता को लाकर व्यक्त करती है.”


पेस्तालॉजी के द्वारा शिक्षा की परिभाषा :-


“शिक्षा मानव की सम्पूर्ण शक्तियों का प्राकृतिक, प्रगतिशील और सामंजस्यपूर्ण विकास है.”


राष्ट्रीय शिक्षा आयोग, 1964-66 के द्वारा शिक्षा की परिभाषा :-


“शिक्षा राष्ट्र के आर्थिक, सामाजिक विकास का शक्तिशाली साधन है, शिक्षा राष्ट्रीय सम्पन्नता एवं राष्ट्र कल्याण की कुंजी है.”


फ्राबेल की परिभाषा :-


“शिक्षा वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा बालक की जन्मजात शक्तियॉबाहर प्रकट होती है.”


हार्न की परिभाषा :-


“शिक्षा शारीरिक और मानसिक रूप से विज्ञान विकसित सचते मानवका अपने मानसिक संवेगात्मक और संकल्पित वातावरण से उत्तम सामंजस्यस्थापित करना है.”

शिक्षा पर विश्वव्यापी घोषणा 'सभी के लिए शिक्षा' जो सन 1990 में की गयी थी उनके अनुसार शिक्षा की परिभाषा बतलाई गयी है. जो इस प्रकार है.  

“शिक्षा बच्चे की बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति का साधन है.”

अगर हम प्राचीन भारत का इतिहास का अध्ययन करे तो शिक्षा का मुख्य उद्देश्य ‘मुक्ति’ की चाह रही है. इसके लिए कहा गया है की, “सा विद्या या विमुक्तये” अर्थात विद्या उसे कहते हैं जो विमुक्त कर दे.

कालांतर में समाज के विकास और आवश्यकता में परिवर्तन के कारण जन्मी जटिलताओं से शिक्षा के उद्देश्य भी बदलते चले गये. 


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आज वर्तमान समय में शिक्षा एक अच्छे से अच्छी नौकरी प्राप्त करके अपने जीवननिर्वाह का साधन होने तक ही सिमित होकर रह गयी है. जबकि इसका एक अलग ही महत्त्व हमारे जीवन में होना चाहिए.

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Shiksha In Hindi

मनीष सिसोदिया (दिल्ली मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री) के शिक्षा के बारे में विचार 


मनीष सिसोदिया एक बहुत बड़ा नाम है और ये जितना बड़ा नाम है शिक्षा के क्षेत्र में वर्तमान में उतने ही बड़े काम इन्होने किये है.

यदि आप भारत में शिक्षा के क्षेत्र में जो अच्छे कार्य वर्तमान में किये जा रहे है. और वो काफी अच्छे कार्य है. लेकिन उनके बारे में हमें जानकारी नहीं है. उनमे से एक जानकारी ये भी है की, हमारे देश की राजधानी दिल्ली के शिक्षा मंत्री श्री मनीष सिसोदिया ने दिल्ली के सरकारी स्कुलो की शिक्षा व्यवस्था में बदलाव करके उसमे सुधार  किये है. वो अभूतपूर्व है. शायद ही ऐसा किसी राज्य के शिक्षा मंत्री ने किया हो. ऐसा मुझे लगता है. 

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इस बारे में आपको जानना बहुत जरुरी है. इस कार्य को करते हुए उनके अनुभवों के ऊपर उनके द्वारा एक पुस्तक (Book) भी लिखी गयी है. जिसका नाम है “शिक्षा-दिल्ली के स्कुलो में मेरे कुछ अभिनव प्रयोग (My Experiments as an Education Minister) इसमें हमें एक अच्छा उदाहरन और सिख मिलती है की शिक्षा प्रणाली में सुधार समय की मांग है.

जो आप आसानी से खरीद सकते है. मैंने जब इसे पढ़ा तो मेरे दिल में भी सकारात्मक उर्जा का प्रसार हुआ. आप भी इसे जरुरु पढ़े. 

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शिक्षा की परिभाषा क्या है : इंडियन गप्पा के अनुसार परिभाषा


अभी तक हमने शिक्षा के बारे में जो महान विचारको के द्वारा दी गयी परिभाषाओ का अध्ययन किया है. हमारे ब्लॉग इंडियन गप्पा के माध्यम से ये जानकारी आपको दी जा रही है. इसीलिए हमारे विचार भी आपको जान लेना जरुरी है.

शिक्षा एक मनुष्य के लिए आवश्यक प्रक्रिया है. जो उसके जाने और अनजाने में भी घटित होती रहती है. जिसके माध्यम से उसके आने वाले जीवन में आमूलाग्र परिवर्तन होते है. 

किसी भी व्यक्ति के सर्वांगीं विकास शिक्षा एक आवश्यक तत्व है. वर्तमान में शिक्षा का महत्त्व काफी बढा है. परन्तु वर्तमान शिक्षा का प्रारूप एक संकुचित प्रारूप में बदल गया है.

कोई भी व्यक्ति एक ही स्थान पर रहकर सभी विषयों की शिक्षा हासिल तो कर सकता है. परन्तु उसमे पारंगत नहीं हो सकता है. ये वर्तमान शिक्षा के प्रारूप में सबसे बड़ी कमी है. 

सबसे बड़ी दुःख की बात यही है, की इसे ही हम आधुनिक शिक्षा कहते है. खैर छोडिये हम अपने इस लेख में आगे बढ़ते है. हमारे द्वारा सभी विचारको के विचारो का निचोड़ कहे जा सकने वाली एक शिक्षा की परिभाषा आपके लिए देने की कोशिश की है. 

हमारे द्वारा जो परिभाषा दी गयी है वो आज वर्तमान से भी जोड़ने की कोशिश हमारे द्वारा की गयी है. जो आप निचे देख सकते है. 



इंडियन गप्पा के अनुसार शिक्षा की परिभाषा क्या है


“किसी व्यक्ति विशेष के सामाजिक, आर्थिक, वैचारिक तथा सर्वांगीन विकास किए लिए जरुरी प्रक्रिया जो एक पीढ़ी से दुसरे पीढ़ी में ज्ञान और समझ के रूप में हस्तांतरित होती है, जिसका आधुनिक युग में प्रभाव संकुचित होने के बावजूद आजीविका निर्माण में इसका महत्त्व है. आज के आधुनिक युग में नैतिक शिक्षा याने value education जरुरी है.



Conclusion :-

हमारे इस लेख में आपको शिक्षा का अर्थ और शिक्षा की परिभाषा क्या है इस बारे में एक सटीक जानकारी दी गयी है. जिसमे के शिक्षा का व्यापक रूप में अर्थ और संकुचित रूप में अर्थ दोनों ही बताये गए. शिक्षा के बारे में प्रमुख विचारको की परिभाषाए भी आपको बताई गयी. आशा है आपको Shiksha In Hindi ये लेख काफी पसंद आया होगा. 

अपने विचार जरुर ही कमेंट करे.....!

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