Ads

शिक्षा का उद्देश्य पर निबंध - शिक्षा का अर्थ एवं उद्देश्य - हिंदी में जाने

शिक्षा का उद्देश्य पर निबंध - शिक्षा का अर्थ एवं उद्देश्य - जानिए

आज के इस लेख में आपको शिक्षा का उद्देश्य पर निबंध कैसे लिखा जाये इस बारे में बताएँगे. साथ ही शिक्षा का अर्थ एवं उद्देश्य क्या है इसके बारे में भी जानकारी देंगे.

शिक्षा की परिभाषा क्या है इसके लिए आप इस वेबसाइट के दुसरे लेख में जाकर देख सकते है. जिसमे आपको शिक्षा की विद्वानों द्वारा बताई परिभाषाये मिलेगी. जिनसे आप शिक्षा का सटीक अर्थ जान पाएंगे.

इस लेख में आपको आधुनिक शिक्षा का उद्देश्य के साथ ही शिक्षा का उद्देश्य पर निबंध देंगे जो आप अपने स्कूल, कॉलेज में परीक्षायो में उपयोगी सिद्ध होगा.

शिक्षा-का-उद्देश्य-पर-निबंध
शिक्षा का उद्देश्य पर निबंध


शिक्षा का उद्देश्य पर निबंध निबंध लिखना शुरू करने से पहले आपको शिक्षा का अर्थ एवं उद्देश्य को खुद जान लेना जरुरी है. जो आपको इस लेख में सरल और सटीक भाषा में बताया जायेगा. जिसमे आपको शिक्षा के उद्देश्य भी संक्षेप में बताये जायेगे. निचे आप उसका अध्यन कर सकते है.

शिक्षा का अर्थ एवं उद्देश्य – सरल और सटीक भाषा में

शिक्षा का अर्थ सही मायने में समझे तो, शिक्षा हमारे मानसिक तथा नैतिक विकास के साथ ही हमारे कौशल और व्यापारी विकास पर केन्द्रित होती है. शिक्षा हमारे समाज में पीढ़ी दर पीढ़ी अपने ज्ञान और समझ को हस्तांतरण का सफल प्रयास है.

शिक्षा एक व्यक्तिगत व सामाजिक विकास की एक सार्थक प्रक्रिया है, अतः इसके सामान्य, विशिष्ट, वैयक्तिक और सामाजिक उद्देश्य अलग अलग है जो कि निम्न प्रकार से है :-

1. शिक्षा के सामान्य उद्देश के अंतर्गत व्यक्ति का व्यवहार, चरित्र ,आचरण, मनोवृति भावनाएं विचारों तथा ज्ञान आदमी परिवर्तन होता है.

2. विशिष उद्देश्य जिन्हें आज सामान्य की संज्ञा दी जाती है, इनकी क्षेत्र तथा प्रकृति सिमित होती है. 

3. वैयक्तिक उद्देश्य शिक्षा का पुराना ही उद्देश्य है. इस उद्देश्य को मानने वाले समाज की अपेक्षा व्यक्ति को बड़ा मानते है.

4. शिक्षा का सामाजिक उद्देश्य हमारे सम्पूर्ण राष्ट्र के भलाई के लिए होना चाहिए न की स्वय की व्यक्तिगत भले के लिए.

शिक्षा के उद्देश्यों का वर्गीकरण

ऊपर हमारे द्वारा शिक्षा का उद्देश्य को संक्षेप में बताया गया है. जिनका वर्गिकरण एकदम ही छोटे रूप में बताया गया है. आगे आपको उनका विस्तृत वर्गीकरण बताया जायेगा.

शिक्षा का विशिष्ट उद्देश्य

विशिष्ट उद्देश्यों को “असामान्य उद्देश्यों” की संज्ञा दी जाती है. इन उदेश्यों का क्षेत्र तथा प्रकृति सीमित होती है. यही नहीं, इनका निर्माण किसी भी विशेष परिस्थिति तथा विशेष कारण को ध्यान में रहते हुए किया जाता है. 
इस दृष्टि से यह उद्देश्य लचीले, अनुकूल योग्य तथा परिवर्तनशील होते हैं दुसरे शब्द में शिक्षा के विशिष्ट उद्देश्य देश, काल तथा परिस्थिति के अनुसार बदलते रहते हैं.

शिक्षा का सार्वभौमिक उद्देश्य

सार्वभौमिक उद्देश्य मानव जाती पर समान रूप से लागू होती है. इन उद्देश्यों का तात्पर्य व्यक्ति में वांछनीय गुणों का विकास करना है. 

अत: इनका क्षेत्र विशिष्ट उद्देश्यों की भांति किसी विशेष स्थान अथवा देश तक सीमित न रह कर सम्पूर्ण मानव जाती है. 

सामान्य उद्देश्यों की प्रकृति भी विशिष्ट उद्देश्यों की भांती सीमित नहीं होती. अत: ये उद्देश्य सनातन, निश्चित तथा अपरिवर्तनशील होते है. 

संसार के सभी शिक्षा दर्शनों ने इन उद्देश्यों के सार्वभौमिक महत्वों को स्वीकार किया है. मानव के व्यक्तित्व का संगठन उचित शारीरिक तथा मानसिक विकास समाज की प्रगति, प्रेम तथा अहिंसा आदि शिक्षा के कुछ ऐसे सार्वभौमिकउद्देश्य है जो, शिक्षा को सार्वभौमिक रूप प्रदान करते हैं.

शिक्षा का वैयक्तिक उद्देश्य 

व्यक्ति वादियों के अनुसार समाज के अपेक्षा व्यक्ति बड़ा है अत: शिक्षा का वैयक्तिक उदेश्य व्यक्ति की व्यक्तिगत शक्तिओं को पूर्णरूपेण विकसित करने पर बल देता है.

प्रसिद्ध शिक्षाशास्त्री सर टी० पी० नन ने इस उदेश्य पर बल देते हुए लिखा है – 
“संसार में जो भी अच्छाई आती है वह व्यक्तिगत पुरूषों तथा स्त्रियों के स्वतंत्र प्रयासों द्वारा आती है. शिक्षा की व्यवस्था इसी सत्य पर आधारित होनी चाहिये तथा शिक्षा को ऐसी दशायें उत्पन्न करनी चाहिये जो वैयक्तिकता का पूर्ण विकास हो सके तथा व्यक्ति मानव जीवन को अपना मौलिक योग दे सके” 


शिक्षा का सामाजिक उद्देश्य 

समाज वादियों के अनुसार व्यक्ति के अपेक्षा समाज बड़ा है. अत: वे शिक्षा सामाजिक उदेश्य पर विशेष बल देते हैं. उनका विश्वास है कि व्यक्ति सामाजिक प्राणी है. 

वह समाज से अलग रह कर अपना विकास नहीं कर सकता है. अत: उनके अनुसार व्यक्ति को अपनी वैयक्तिकता का विकास समाज की आवश्यकताओं तथा आदर्शों को ध्यान में रखते हुए करना चाहिये.

ध्यान देने की बात है कि उपर्युत्क विशिष्ट तथा सार्वभौमिक उदेश्यों में सन्तुलन बनाये रखना परम आवश्यक है.
 
ऐसे ही वैयक्तिक तथा सामाजिक उदेश्यों के बीच सन्तुलन तथा समन्वय स्थापित करने से व्यक्ति तथा समाज दोनों उन्नति की शिखर पर चढ़ते रहेंगे.

आशा है आप दोनों मुद्दों के माध्यम से शिक्षा का अर्थ एवं उद्देश्य को पूरी तरह समझ पाये होंगे. तो आईये निबंध शुरू करते है.....!

शिक्षा-का-अर्थ-एवं-उद्देश्य
शिक्षा का अर्थ एवं उद्देश्य

शिक्षा का उद्देश्य पर निबंध - Shiksha Ka Uddeshya Essay

Shiksha Ka Uddeshya Essay इस विचार को लेकर हमारे मन में काफी सवाल चलते रहते है. शिक्षा एक ज्ञानवर्धन का साधन है. सांस्कृतिक एक जीवन का माध्यम है. चरित्र की निर्माता है. जीवनोपार्जन का द्वार है. अपनी क्षमताओं का पूर्ण उपयोग करते हुए जीवन जीने के कला के साथ-साथ व्यक्तित्व के विकास का पथ-प्रदर्शन भी है.

मानव विकास का मापदण्ड ज्ञान है. ज्ञान से बुद्धि प्रशिक्षित होती है तथा मस्तिष्क में विचारों का जन्म होता है. यह विचार विवेक जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता का साधन है. 

शारीरिक हो या मानसिक, आधि हो या व्याधि, समस्याएँ हों या संकट, सभी का समाधान ज्ञान की चाबी से होता है.

ज्ञान प्राप्ति के लिए शिक्षा-ज्ञान प्राप्ति शिक्षा का महत्वपूर्ण उद्देश्य है. आधुनिक सभ्यता शिक्षा के माध्यम द्वारा ज्ञान प्राप्त करके विकसित हुई है. न तो ज्ञान अपने आप में सम्पूर्ण शिक्षा है, न ही शिक्षा का अन्तिम उद्देश्य, यह तो शिक्षा का मात्र एक भाग है और एक साधन है. 

अत: शिक्षा का उद्देश्य सांस्कृतिक ज्ञान की प्राप्ति होना चाहिए ताकि मानव सभ्य, शिष्ट, संयत बने, साहित्य, संगीत और कला आदि का विकास कर सके. जीवन को मूल्यवान् बनाकर जीवन स्तर को ऊँचा उठा सके. साथ ही आने वाली पीढ़ी को सांस्कृतिक धरोहर सौंप सके.

शिक्षा के बारे में हमारे सबसे बेतरीन आर्टिकल  जरुर पढ़े

शिक्षा का अर्थ - शिक्षा की परिभाषा क्या है - Shiksha In Hindi

what is value education : types and importance in life

चरित्र के लिए शिक्षा-चरित्र का अर्थ है, वे सब बातें जो आचरण, व्यवहार आदि के रूप में की जायें.’ प्लूटार्क के अनुसार, ‘चरित्र केवल सुदीर्घकालीन आदत है.’ वाल्मीकि का कथन है, ‘मनुष्य के चरित्र से ही ज्ञात होता है कि वह कुलीन है या अकुलीन, वीर है या दंभी, पवित्र है या अपवित्र.’

चरित्र दो प्रकार का होता है-अच्छा और बुरा. सच्चरित्र ही समाज की शोभा है. इसके निर्माण का दायित्व वहन करती है शिक्षा. गांधीजी के शब्दों में ‘चरित्र शुद्धि ठोस शिक्षा की बुनियाद है.’ 

इस बारे में डॉ. डी. एन. खोखला का कहना कुछ इस प्रकार है :- 

‘शिक्षा का उद्देश्य सांवेगिक एवं नैतिक विकास होना चाहिए. एक अच्छा इंजीनियर या डॉक्टर बेकार है, यदि उसमें नैतिकता के गुण नहीं. कारण, चरित्र हीन ज्ञानी सिर्फ ज्ञान का भार ढोता है. वास्तविक शिक्षा मानव में निहित सद्गुण एवं पूर्णत्व का विकास करती है.

व्यवसाय के लिए शिक्षा-व्यवसाय का अर्थ है, ‘जीवन निर्वाह का साधन’. इसका अर्थ यह है कि शिक्षा में इतनी शक्ति होनी चाहिए कि वह ‘अर्थकारी’ हो अर्थात् शिक्षित व्यक्ति की रोजी-रोटी की गारण्टी ले सके. 
गांधीजी के शब्दों में कहा जाये तो, “सच्ची शिक्षा बेरोजगारी के विरुद्ध बीमे के रूप में होनी चाहिए.”

जीने की कला की शिक्षा-शिक्षा के ऊपर लिखे चारों उद्देश्य-ज्ञान प्राप्ति, संस्कृति, चरित्र तथा व्यवसाय के लिए एकांगी हैं, स्वतः सम्पूर्ण नहीं. जीवन के लिए चाहिए, ‘जीने की कला’ की शिक्षा. शिक्षा जीवन की जटिल प्रक्रिया और दु:ख, कष्ट, विपत्ति में जीवन को सुखमय बनाने की क्षमता और योग्यता प्रदान करे.

स्पैन्सर शिक्षा में एक व्यापक उद्देश्य अर्थात् सम्पूर्ण जीवन के सभी पक्ष में सम्पूर्ण विकास का समर्थन करता है. वह पुस्तकालीयता का खंडन करता है तथा परिवार चलाने, सामाजिक, आर्थिक सम्बन्धों को चलाने तथा भावनात्मक विकास करने वाली क्रियाओं का समर्थन करता है. 

इन क्रियाओं में सफलता के पश्चात् व्यक्ति आगामी जीवन के लिए तैयार हो जाता है.

व्यक्तित्व विकास के लिए शिक्षा-महादेवी जी की धारणा है कि शिक्षा व्यक्तित्व के विकास के लिए भी है और जीवकोपार्जन के लिए भी. अत: उसका उद्देश्य दोहरा हो जाता है. 

स्वतंत्र भारत का उत्तरदायित्वपूर्ण नागरिक होने के लिए विद्यार्थी वर्ग को चरित्र की आवश्यकता थी, जो व्यक्तित्व विकास में ही सम्भव थी, जीवकोपार्जन की क्षमता सबका सामाजिक प्राप्य थी. 

दोनों अन्तः बाहय लक्ष्यों की उपेक्षा कर देने से शिक्षा एक प्रकार से समय बिताने का साधन हो गई. यह उपेक्षापूर्ण सत्य तब प्रकट हुआ जब विद्यार्थी ने शिक्षा के सब सोपान पार कर लिए.

व्यक्तित्व विकास के लक्ष्य के अभाव ने विद्यार्थी के आचरण को प्रभावित किया और आजीविका के अभाव ने उसे परजीवी बनाकर असामाजिक कर दिया.’

Conclusion :-

शिक्षा का उद्देश्य पर निबंध जिसमे आपको सबसे पहले शिक्षा का अर्थ एवं उद्देश्य के बारे में अच्छी जानकारी दी गयी उसके बाद एक अच्छा Shiksha Ka Uddeshya Essay बताया गया. ये Essay आपको कैसा लगा आप हमें जरुर बताये.

अपने विचार ही कमेंट करे......... धन्यवाद....! 

Post a Comment

0 Comments